वर्ष 2014 में मंदिर प्रांगण में अनुष्ठित विष्णु महायज्ञ के समय मन्दिर के ट्रस्टियों ने मंदिर परिसर में एक गौशाला की स्थापना करने का संकल्प लिया एवं गोपाल गौशाला, झुंझुनू से 4 गौ माताओं को मंगाकर गौशाला स्थापित की गई।
गौशाला की स्थापना से दाता आकर्षित हुए एवं और भी गायें दान स्वरुप प्राप्त हुई। वर्तमान में गौशाला में 64 गोवंश हैं। गौशाला में सभी गौवंशों की सर्व प्रकार से सेवा की जाती है।
गौशाला में प्राप्त दूध मंदिर प्रांगण अवस्थित सभी देवालयों में अभिषेक एवं प्रसाद के काम में लिया जाता है। गाय के गोबर की खाद मंदिर की कृषि भूमि में खाद के काम में ली जाती है।
गायों की चिकित्सा के लिए डॉक्टर एवं कम्पाउण्डर भी नियुक्त है। गौशाला को आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।